The Jammu and Kashmir Bank Limited has officially released the Apprentice Recruitment 2026 Notification under the National Apprenticeship Training Scheme (NATS). A total of 614 vacancies have been announced for candidates seeking training opportunities in the banking sector.
The online application process will begin from April 20, 2026 and will continue till April 26, 2026. Interested candidates must apply within this short window through the official website.
J&K Bank Apprentice 2026 – Overview
| Particulars | Details |
|---|---|
| Organisation | J&K Bank |
| Post Name | Apprentice |
| Total Vacancies | 614 |
| Training Duration | 12 Months |
| Application Mode | Online |
| Start Date | 20 April 2026 |
| Last Date | 26 April 2026 |
| Official Website | jkb.bank.in |
Important Dates
- Notification Release: 17 April 2026
- Application Start: 20 April 2026
- Last Date to Apply: 26 April 2026
- Exam Date: To be announced
Application Fee
| Category | Fee |
|---|---|
| General | ₹700 |
| Reserved | ₹500 |
देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए 1 अप्रैल 2026 एक बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है। केंद्र सरकार लंबे समय से लंबित नए लेबर कोड को लागू करने की दिशा में अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यदि यह लागू होता है, तो कर्मचारियों की सैलरी से लेकर काम के घंटे, ओवरटाइम और सामाजिक सुरक्षा तक कई अहम बदलाव देखने को मिलेंगे। यह बदलाव सिर्फ नौकरी करने वालों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उद्योगों और रोजगार के पूरे ढांचे को प्रभावित करेगा।
पुराने 44 कानूनों की जगह आएंगे चार नए कोड
सरकार ने देश के जटिल और पुराने 44 श्रम कानूनों को हटाकर उन्हें चार बड़े लेबर कोड में समाहित किया है। इनमें वेज कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड, इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड शामिल हैं। इनका मकसद नियमों को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा देना है। इससे कंपनियों को भी नियमों के पालन में आसानी होगी और प्रशासनिक बोझ कम होगा।
वर्किंग आवर्स में लचीलापन, लेकिन नियम रहेंगे तय
नए लेबर कोड के लागू होने के बाद काम के घंटे मूल रूप से 8 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे प्रति सप्ताह ही रहेंगे, लेकिन इसमें लचीलापन बढ़ाया जाएगा। कंपनियां अब कर्मचारियों के साथ सहमति से शिफ्ट और वर्किंग सिस्टम तय कर सकेंगी। इससे वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है। बदलते कार्य माहौल में यह कदम कर्मचारियों के लिए राहत देने वाला माना जा रहा है।
सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव से PF और ग्रेच्युटी बढ़ेगी
नए नियमों के अनुसार कर्मचारियों की बेसिक सैलरी कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत होना जरूरी हो सकता है। इसका सीधा असर पीएफ और ग्रेच्युटी पर पड़ेगा, जो पहले की तुलना में अधिक हो जाएंगे। हालांकि इसके चलते कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, क्योंकि अधिक हिस्सा भविष्य के फंड में जाएगा। विशेषज्ञ इसे लंबी अवधि में फायदेमंद मान रहे हैं, क्योंकि इससे रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।
सामाजिक सुरक्षा का दायरा होगा और व्यापक
सरकार की योजना है कि नए लेबर कोड के जरिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा पहले से कहीं अधिक बढ़ाया जाए। मार्च 2026 तक लगभग 100 करोड़ श्रमिकों को इस दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि इसमें असंगठित क्षेत्र के मजदूर, गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और स्वरोजगार करने वाले लोग भी शामिल होंगे। इससे पहली बार इन वर्गों को पेंशन, बीमा और अन्य सुरक्षा सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
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महिलाओं के लिए नए अवसर और सुरक्षा प्रावधान
नए श्रम कानूनों में महिलाओं को लेकर भी कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। अब महिलाओं को सभी शिफ्टों में काम करने की अनुमति होगी, बशर्ते कंपनियां उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें। इसके साथ ही समान काम के लिए समान वेतन के नियम को और सख्ती से लागू किया जाएगा। यह बदलाव कार्यस्थल पर लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
नौकरी में पारदर्शिता बढ़ेगी, नियुक्ति पत्र अनिवार्य
नए नियमों के तहत सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य किया जाएगा। इससे कर्मचारियों को कानूनी पहचान मिलेगी और किसी भी विवाद की स्थिति में उन्हें सुरक्षा मिल सकेगी। इसके अलावा 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के कर्मचारियों के लिए सालाना स्वास्थ्य जांच का प्रावधान भी जोड़ा गया है, जिससे उनकी सेहत पर ध्यान दिया जा सके।
ओवरटाइम के नियम होंगे स्पष्ट और पारदर्शी
ओवरटाइम को लेकर भी नए लेबर कोड में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। अतिरिक्त काम के लिए कर्मचारियों को उचित भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा और इस प्रक्रिया को पूरी तरह नियमबद्ध किया जाएगा। यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगी, जिससे कर्मचारियों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे और कंपनियों को भी आवश्यकतानुसार काम बढ़ाने में सुविधा मिलेगी।
उद्योग और रोजगार दोनों को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि इन सुधारों से उद्योगों को गति मिलेगी और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। एक तरफ कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा और भविष्य की गारंटी मिलेगी, वहीं कंपनियों को सरल नियमों के तहत काम करने की सुविधा मिलेगी। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
लागू होने की तारीख पर राज्यों की भूमिका अहम
हालांकि केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से इन नियमों को लागू करने के संकेत दिए हैं, लेकिन इसकी अंतिम तारीख राज्यों की तैयारी पर निर्भर करेगी। राज्यों को भी अपने स्तर पर नियमों को लागू करना होगा। ऐसे में यह संभव है कि कुछ राज्यों में यह पहले लागू हो जाए और कुछ में थोड़ी देरी हो।
कुल मिलाकर, नया लेबर कोड कर्मचारियों के लिए सिर्फ नियमों का बदलाव नहीं, बल्कि उनके काम करने के तरीके और भविष्य की सुरक्षा को पूरी तरह बदलने वाला कदम साबित हो सकता है।
